Tuesday, 2 December 2014

Bhopal tragedy

Bhopal disaster 1984: क्या है
भोपाल गैस कांड
02 दिसंबर, 1984 को घटित भोपाल गैस
त्रासदी भारत के इतिहास में वह काला अध्याय है
जिसे शायद ही कभी भुलाया जा सकेगा. भोपाल
स्थित यूनियन कार्बाइड प्लांट में 2 दिसंबर
को आधी रात में मिथाइल आइसोनेट (एमआईसी) के
रिसाव के कारण हजारों की तादाद में
लोगों की मृत्यु हो गई. सरकारी आंकड़ों के
मुताबिक इस दुर्घटना के कुछ ही घंटों के भीतर
तीन हज़ार लोग मारे गए थे. लेकिन
हमेशा की तरह यह सिर्फ सरकारी आंकड़ा था और
मरने वालों की संख्या और भी ज्यादा थी.
Bhopal disaster 1984 Effects:
भोपाल गैस कांड के पीड़ित
इस घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट को सौंपे गए
शपथ पत्र में मरने वालों की संख्या 5295 है
जबकि राज्य सरकार ने एक अन्य याचिका में मरने
वाले लोगों की संख्या 15248 बताई है. इस
तरह उक्त आंकड़ों को देखें तो विरोधाभास झलक
रहा है. यही नहीं इस हादसे में बीमार होने वाले
लोगों के आंकड़ों की संख्या में भी संशय के बादल
हैं. 2004 तक साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोग
इस गैस रिसाव के कारण बीमारी की चपेट में आये
जिनका इलाज जारी है.
Justice in Bhopal disaster 1984:
भोपाल कांड का न्याय
दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी और 15
हजार से ज्यादा जानें छीनने वाली व पांच लाख से
ज्यादा लोगों को अपने घातक जद में लेने
वाली इस नरसंहारक घटना की मुआवजा राशि मात्र
713 करोड़ रुपये. भारत सरकार की अति रुचि और
यूनियन गैस कार्बाइड कारपोरेशन के
प्रति अतिरिक्त मोह ने गैस
पीड़ितों की संभावनाओं का गला घोंट दिया.

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